Osho Ke Karantikari Vichar

         Osho Ke Revolutionary Quotes

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Hi Friends
इस Article मे Osho के ओ 10 विचार धारा सामने रखूँगा जिससे आपकी विचार धारा मे तो थोड़ा सा तो बदलौ जरूर आएगा वैसे तो लोग Osho को Sex Guru नाम दे दिये है पर Osho सिर्फ Sex पर ही नही बोले है बल्कि Osho तो ऐसे तमाम चीज पर बोले है जिससे एक सफल और अच्छी दुनिया बन सके पर लोग Osho को सिर्फ Sex Guru के नाम से जानते है ,

ऐसा नही है कि osho sex मे डूबने को कहते थे बल्कि ओशो तो Sex के Beyond कैसे जाया जाए ओ बताते थे क्यूंकि अगर Sex मे ही डूबे रहे तो Life मे कभी Success नही हो पाओगे क्युकी इस दुनिया मे जितने भी सफल व्यक्ति हूए है ओ लोग सेक्स के उपर चले गए व्यक्ति थे , ऐसा नही है के उन लोगो के अंदर से सेक्स खत्म हो गया है बस इतना है कि उनके अंदर Sex तो है पर Sex के गुलाम नही

(1) कल की फिक्र मे तुम आज को जीना मत भुल जाना क्योंकि कि जीवन आज  मे है कल मे नही कल क्या होगा यह सोचते सोचते तुम्हारे हाथ से जिवन खत्म हो जाएगा लेकिन ओ कल कभी नही आएगा |

(2) मत सोचो की तुमहारा सच्चा मित्र कौन है बल्की ये सोचो कि तुम किसके सच्चे मित्र हो

(3) धर्म कभी खराब नही होता ईंसान ही खराब होता है और खराब ईंसान का कभी कोई भी धर्म नही होता है

(4) एक ही पाप है इस दुनिया मे किसी दुसरे की स्वतंत्रता को छिन्न क्योंकी दुसरे को बदलना राजनीतिक है और स्वयं को बदलना धर्म है

(5) मनुष्य की गहरी से गहरी और पहली बिमारी अहंकार है और जहां अहंकार है वहां दया झूठी है और जहां अहंकार है वहां अहिंसा झूठी है और जहां अहंकार है वहां शांति झूठी है और जहां अहंकार है वहां कल्याण और मंगल और लोकहित की बाते झूठी है क्योंकि जहां अहंकार है वहां ये सारी की सारी चीजें अहंकार के आभूषण के अतिरिक्त और कुछ भी नही है

(6) धार्मिक मनुष्य यह कभी नही सोचता कि लोग क्या कहेंगे धार्मिक मनुष्य तो देखता है की उसकी आत्मा क्या कहती है वह आदमी तो कमजोर है गुलाम है जो यह सोचता है की लोग क्या कहेंगे वह आदमी तो परतंत्र है धार्मिक चित तो देखता है की मेरे प्राण क्या कहते है सारी दुनिया क्या कहे इससे कोई फर्क नही पड़ता है

(7) दुनिया मे कोई भी संतुष्ट नही है गरीब अमीर होना चाहतें है अमीर सुंदर होना चाहते है कुंवारे सादी करना चाहते है सादी सुदा मरना चाहते है यहां हर आदमी दुखी है इसका कारण इतना ही है की यहां कोई अपने होने मे राजी नही है हरेक आदमी दुसरे जैसा होना चाहता है जबकी सुखी होने का फार्मूला है तुम अपने होने मे राजी हो जाओ क्योंकि तुम सिर्फ तुम हो

(8) इस दुनिया मे न हिन्दओ की जरूरत है न मुसलमानो की न इसाइयो की इस दुनिया मे तो सिर्फ धार्मिक लोगों की जरूरत है और धार्मिक व्यक्ति साम्प्रदायिक नही होता है धार्मिक व्यक्ति राजनैतिक नही होता धार्मिक व्यक्ति किसी देश किसी सीमा मे आबद्ध नही होता है

(9) जिनको तुम जीवन मे  सफल देखते हो ये वही लोग है जो प्रेम के बिना जी रहे है प्रेम और सफलता का जोड़ नही बनता क्योंकि सफलता के जितना कठोर होना पड़ता है और प्रेम उतना कठोर होने की सुविधा नही देता है

(10) यदी कोई स्त्री या पुरुष आपस मे मित्र हो तो ये कोई जरूरी नही है कि उनके बिच कुछ गलत ही हो कुछ रिश्ते पवित्रता की हद से भी ऊंची होते है और ये हमारी सोच पर निर्भर पड़ता है

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